रविवार, 3 नवंबर 2024

मैं जीना चाहती हूं ...

मैं जीना चाहती हूँ:


मैं सोचती हूं कुछ पल के लिए ज़िंदगी थम जाए,

और मैं वो कर लूं, जो चाहती हूं मैं सच्चे दिल से।

जो मेरी आत्मा को संतुष्ट कर सके,

मैं जीना चाहती हूं ज़िंदगी अपने तरीके से।



मैं जीना चाहती हूं, सिर्फ जीना,

जैसे परिंदे उड़ते हैं खुले आसमान में बेखौफ।

न कोई बंधन हो, न कोई रोकटोक,

बस जीने का आनंद हो, हर एक पल में खुशी हो।



मैं जीना चाहती हूं ऐसे, जो आवाज हो हक़ की, सच की,

मैं जीना चाहती हूं बिना डरे, बिना रूके,

मैं जीना चाहती हूं अपने सपनों के साथ,

हर लम्हा खुलकर जीना चाहती हूं।

बोल की लब आज़ाद हैं तेरे....

कामयाबी जिंदा रहने का नाम नहीं बल्कि हक़ पर चलते हुए मज़लूमों के लिए जान निछावर करने का नाम है................. मेरे कातिलों से ...