गुरुवार, 11 जुलाई 2024

दिल की गलियों से......

हमारा दिल और दिमाग़ हमेशा एक दूसरे से बातें करते रहेतें हैं किन्तु इनके शब्द अनकहे होते हैं जिसे हम महसूस करते  हैं और  इसी का नाम एहसास हैदिल की गलियों में मैं आपके साथ अपने इसी एहसास को share कर रही हूँ.........


आज़ इंसान चारों ओर से ज़ुल्म की मज़बूत दीवारों से घिरा हुआ है जिसे तोड़कर बाहर निकलने के लिए बुलंद हौसलों के साथ-साथ मजबूत ईमान चाहिए और ऐसा करना हर किसी के बस में नहीं अल्लाह के कुछ चुनिंदा बंदे ही ज़ुल्म की मज़बूत दीवारों को गिराने का हौसला रखते हैं... और ये वही लोग हैं जो इतिहास को लिखने के साथ-साथ उसे सही दिशा देते हैं......


कम अक़्ल वो नहीं जिसके पास दिमाग़ नहीं बल्कि कम अक़्ल वो है जो सब कुछ जानते हुए भी ग़लत का साथ देता है.......


जो लोग ये मानते हैं कि पैसा हाथों की मैल़ है वो जान लें कि ये मैल़ इतनी कीमती है कि इसके ना होने पर आपको आपका अपना भी पहचानने से इंकार कर देता है और होने पर ग़ैर भी अपना बन जाता है....


कौन कहता है कि बच्चे स्वार्थी नहीं होते जब वह छोटे होतें हैं तो उन्हें  जो चाहिए होता है उसे रो-धोकर नखरे दिखा कर माता पिता से मनवाने की पूरी कोशिश करते हैं, जब थोड़ा और बड़े होते हैं तो रूठकर मूंह फूला कर माता पिता से अपनी वाली मनवा लेते हैं, और यही बच्चे जब जवानी की दहलीज़ पर क़दम रखते हैं तो फिर उन्हें अपनी मनमानी करने के लिए माता-पिता से पूछनें की भी आवश्यकता नहीं पड़ती निष्कर्ष यह निकलता है कि मनुष्य जन्मजात स्वार्थी होता है.........



जिंदा है ज़मीर उनका जो मज़लूमों के बहते हुए खून को रोकने के लिए अपने खून को पानी की तरह बहा देते हैं.....



आप खुश रहने के लिए चाहे हिमाचल की खूबसूरत वादियों की सैर करें या फिर कश्मीर में जाकर जन्नत का नज़ारा करें आपको खुशी तब-तक हासिल नहीं होगी जबतक कि आप दिल से खुश नहीं होते.......



किसी के चेहरे को देखकर आप उसकी खुबसूरती का तो आंकलन कर सकते हैं खुब-सीरती का नहीं........




ज़्यादातर लोग दुनिया की डर से विचारों को अपने अंदर दफ़न किए होते हैं... जल्द ही ये लोग अंदर-अंदर खोखले हो जातें हैं.........










 

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